Aharbinger's Weblog

Just another WordPress.com weblog

अशआर

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on May 26, 2007

अपना कशकोल छिपा लो तो सभी हातिम हैं
वरना हर शख्स भिखारी है, जिधर जाओगे.

मैदां की हार-जीत तो किस्मत की बात है
टूटी है किसके हाथ में तलवार देखना.
हरेक आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी
जिसको भी देखना, कई बार देखना.

Advertisements

3 Responses to “अशआर”

  1. dilip said

    दरअसल इस देश के लोकतंत्र में व्यवस्था ऐसी बन गई है कि सरकार का मुख्य काम कॉरपोरेट सेक्टर का हित देखना बन गया है, लेकिन कुछ इस तरह से कि आम लोगों को लगे कि सरकार उनके भले के लिए काम कर रही है। जो सरकारें ये संतुलन बना लेती हैं उन्हें सफल सरकार कहा जाता है। इस मामले में यूपीए सरकार संतुलन खो रही है। कॉरपोरेट सेक्टर तो खुश है कि सरकार उसके मन की हर मुराद पूरी कर रही है। लेकिन आम लोगों में छले जाने का एहसास बढ़ रहा है। ये असंतुलन देश भर में अलग अलग शक्लों में असंतोष का कारण बन रहा है। ईष्टदेव जी ने अच्छा विषय छेड़ा है। इसपर और काम होना चाहिए। और भरपूर मात्रा में लिखा जाना चाहिए। आखिर ये देश हम सबका है और इस पर राज करने के लिए जब हम कोई सरकार चुनते हैं तो उसके सामने ये मजबूरी होनी चाहिए कि वो अधिकतम लोगों के अधिकतम हित का ध्यान रखे। -दिलीप मंडल

  2. dilip said

    बढ़िया विषय पर अच्छा लेख है।

  3. kuldip said

    बहुत खुब। कवितायों में भाव और भंगिमा दोनो हैं।कीट्स ने कह था कि Poetry should come like a leaf falling from a tree. Or not come at all.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: