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गीतों से

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on May 31, 2007

हम नए हैं
नए थे भी
नए आगे भी रहेंगे

यह हमारा गीत होना
सुनो समयातीत होना है
बन सदाशिव
जहर से अमृत बिलोना है
कल दहे थे
दह रहे हैं
कंठ आगे भी दहेंगे

हम नए हैं
नए थे भी
नए आगे भी रहेंगे
कुमार रवीन्द्र

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One Response to “गीतों से”

  1. कुमार रवीन्द्र जी..बहुत गहरी रचना है:यह हमारा गीत होनासुनो समयातीत होना हैबन सदाशिवजहर से अमृत बिलोना हैकल दहे थेदह रहे हैंकंठ आगे भी दहेंगेबधाई आपको।*** राजीव रंजन प्रसाद

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