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एक चेहरा ज़िंदगी का

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on July 8, 2007

उस वक़्त मैं गाजियाबाद के प्रताप विहार में था, जब ‘सारे जहाँ से अच्छा’ की धुन सुनायी पडी. मैंने मोबाइल निकला तो पता चला संस्थान का नंबर था. पहले तो लगा कि भला रविवार को किसे मेरी जरूरत पड़ गई और क्यों? उठाया तो उधर से एक चिर-परिचित और बिल्कुल अनौपचारिक आवाज थी. फिर पूछा आपने सखी में बहुत पहले चंद्रशेखर जी पर कुचह लिखा था. मैंने कहा हाँ. ‘उसकी एस्टीवाई फ़ाइल चाहिए.’ उधर से आवाज आयी. ‘वह तो अब नहीं मिल सकती’ मैंने उन्हें तकनीकी समस्या बताई और उसे जागरण डॉट कॉम से उठा लेने को कहा. उन्होने बताया कि असल में चंद्र शेखर जी नहीं रहे. जान कर अचानक धक्का सा लगा. बीमार तो वह काफी दिनों से चल रहे थे, पर अचानक यह दुखद खबर मिलेगी ऐसा सोचा नहीं था. आम तौर पर राजनेताओं के निधन की खबर मुझे दुखी नहीं कर पाती. पर यह खबर मुझे हिला सी गई. इसलिए नहीं कि चंद्रशेखर से मेरी कोई बड़ी घनिष्ठता थी, इसलिए कि उन्हें इस देश की गरीब जनता की आख़िरी उम्मीद के तौर पर देखा जा सकता था. धनकुबेरों और रईसजदों द्वारा अपहृत भारतीय राजनीति के इस दौर में वह एक ऎसी शख्सियत थे जिसे भारतीय जनता के जीवन का सच पता था. जो यह जानता था कि आटा खेत में पैदा नहीं होता. गेहूं पैदा होता है और पिसा कर आटा बनाया जाता है. जिसे मालूम था भारत के ज़्यादातर गांवों में अभी भी सड़क, बिजली, टेलीफोन और सिंचाई के लिए नहर तक नहीं है. जिसे मालुम था कि इस देश के अधिकतर अभिभावक निजी स्कूलों की फ़ीस भरने लायक नहीं है. अब वैसा कौन दिखता है. अब प्रधानमंत्री पद के जो दावेदार बनाए जा रहे हैं, उनके हाथों में देश का भविष्य क्या होगा, इसका अंदाजा अभी ही लगाया जा सकता है. बेशक चंद्रशेखर महान लोगों में नहीं थे, लेकिन वह काबिल लोगों में जरूर शुमार थे. वैसे भी राजनीति में सिर्फ ओढा हुआ लबादा ही होता है. चंद्रशेखर ने कभी भी वह लबादा नहीं ओढा, पर उन्होने कभी कोई ओछी टिप्पणी की हो, या कभी कोई अर्थराहित या तर्कराहित बात की हो ऐसा मुझे याद नहीं आता. महानता का लबादा ओढ़े बग़ैर भी वह कभी राजनीति के मसखरों की जमात में भी शामिल नहीं हुए. उन्होने अपनी और अपनी बात की गरिमा हमेशा बनाए रखी. लालबहादुर शास्त्री और नरसिंह राव के बाद एक बार फिर यह कहना सिर्फ औपचारिकता होगी कि चंद्रशेखर का निधन देश की बड़ी क्षति है. मेरे जैसे बहुत से लोग इस बात को अपने भीतर महसूस कर रहे होंगे. ऐसा लग रहा है गोया भारतीय राजनीति से आम आदमी का चेहरा इश्वर ने हमेशा के लिए डिलीट कर दिया हो.
ईश्वर चंद्रशेखर की आत्मा को शांति प्रदान करे.
इष्ट देव सांकृत्यायन
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6 Responses to “एक चेहरा ज़िंदगी का”

  1. सही है, महानता और मसखरी के बिना भी कोई अर्थपूर्ण जीवन जी सकता है – यह चन्द्रशेखर जी ने बता दिया.

  2. सही है, महानता और मसखरी के बिना भी कोई अर्थपूर्ण जीवन जी सकता है – यह चन्द्रशेखर जी ने बता दिया.

  3. चंद्र्शेखरजी को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

  4. चन्द्रशेखर जी को विनम्र श्रृद्धांजली-ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.

  5. ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः

  6. Anil Arya said

    जिसने जीवन भर सिद्धांतों को जिया हो वो भला मसखरा कैसे हो सकता है ? नमन इस महामानव को…

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