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जिंदगी से रूठना आता नहीं

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on October 18, 2008

(Written by Manthan)

जिंदगी से रूठना आता नहीं
पर मुझे इसका चलन भाता नहीं

हर किसी को हर किसी से गर्ज है
बेगरज भी तो जिया जाता नहीं


यूँ तो मिलता है मुझे वो प्यार से
क्या है उसके दिल में बतलाता नहीं


भूल बैठे हैं मुझे अपने सभी
डाकिया भी ख़त कोई लाता नहीं

मौसिकी जब से हुई बेआबरू
अब कोई फनकार कुछ गाता नहीं

तंग होगा भूक से वो अजनबी
बेवजह कोई भी विष खाता नहीं

आइनों का शहर है ये सोच ले
आइनों se jhoot chhup paata nahin
(I love it, so I present it…..Just enjoy.)

















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9 Responses to “जिंदगी से रूठना आता नहीं”

  1. हर किसी को हर किसी से गर्ज हैबेगरज भी तो जिया जाता नहीं यूँ तो मिलता है मुझे वो प्यार सेक्या है उसके दिल में बतलाता नहीं बहुत सुंदर लिखा है

  2. manthan said

    यूँ तो मिलता है मुझे वो प्यार सेक्या है उसके दिल में बतलाता नहीं अब तो बता दो… अब तो बता दो…

  3. मीत said

    यूँ तो मिलता है मुझे वो प्यार सेक्या है उसके दिल में बतलाता नहीं बहुत बढ़िया.

  4. तंग होगा भूक से वो अजनबी बेवजह कोई भी विष खाता नहींक्या बात है, बहुत ही सुंदरधन्यवाद

  5. यूँ तो मिलता है मुझे वो प्यार सेक्या है उसके दिल में बतलाता नहीं बढ़िया है भाई…अच्छा लगा…बधाई

  6. makrand said

    तंग होगा भूक से वो अजनबी बेवजह कोई भी विष खाता नहींबहुत उम्दा लेखन

  7. makrand said

    तंग होगा भूक से वो अजनबी बेवजह कोई भी विष खाता नहींबहुत उम्दा लेखन

  8. आइनों का शहर है ये सोच ले आइनों से झूठ छुप पाता नहीं बहुत सुंदर!

  9. मौसिकी जब से हुई बेआबरूअब कोई फनकार कुछ गाता नहींबहुत खूब!!

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