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कश्मीर पर ओबामा को रोकने की जरूरत

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on November 6, 2008

कश्मीर क्राइसिस को लेकर डेमोक्रेट प्रत्याशी के तौर पर ओबामा ने एमएसएनबीसी न्यूज चैनल के राशेल मिडो के साथ बातचीत के दौरान कहा था, हमलोगों को भारत और पाकिस्तान के बीच में कश्मीर क्राइसिस को हेकर बेहतर समझ बनाने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। ताकि भारत पर नहीं,बल्कि कश्मीर में मिलिटेंट पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। ओबामा का कहना था कि एक बार कश्मीर समस्या का समाधान हो जाने के बाद पाकिस्तान अपने क्षेत्र के अंदर मिलिटेंट से निपटने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।
जनरल आम्स कंट्रोल को 25 सितंबर को दिये गये एक साक्षात्कार में ओबामा ने कहा था, भारत और पाकिस्तान के बीच हथियारों की दौड़ के राजनीतिक जड़ों को संबोधित करने के लिए कश्मीर समस्या के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाले प्रयासों का मैं लगातार समथन करुंगा। ओबामा के राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद कश्मीरी नेताओं को अपनी नेतागिरी चमकाने का मौका मिल गया है। ऑल पाटीज हूरियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारुख ने कहा है, हमें लगता है कि कश्मीर समस्या के समाधान में अमेरिका की भूमिका है और हमें उम्मीद है कि ओबामा अपने उत्तरदायित्व को पूरा करेंगे। हमें उम्मीद है कि प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने कश्मीर के संबंध में जो उत्साहजनक बयान दिया था उसे व्यवहारिक रूप प्रदान करेंगे। ओबामा के राष्ट्रपति बनने से उत्साहित हूरियत नेता सय्यीद अली गिलानी ने कहा है, अमेरिक राष्ट्रपति भारत पर कश्मीर के लोगों से किये गये वादे स्व-निणय का अधिकार देने के लिए दबाव बनाएंगे। इसी तरह के बयान कश्मीर के बहुत सारे छोटे-बड़े संगठनों के नेताओं ने दिये हैं। जम्मू-कश्मीर हाई कोट बार एसोसिएशन उन्हें एक पत्र लिखने जा रहा है। इस पत्र में वह कश्मीर समस्या के समाधान के लिए ओबामा से हस्तक्षेप करने का अनुरोध करने वाले हैं। ये लोग ओबामा से कहेंगे कि कश्मीर के संबंध में यूनाइटेड नेशन के प्रस्ताव को लागू करने के लिए नई दिल्ली से कहे।
इन सारी खबरों का लब्बोलुआब यह है कि ओबामा के व्हाइट हाउस में जाते ही कश्मीर समस्या का एक बार फिर अंतरराष्ट्रीयकरण करने की साजिश तेज होने वाली है। भारतीय कूटनयिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है आधिकारिकतौर पर व्हाइट हाउस से कश्मीर के संबंध में किसी भी तरह की बयानबाजी को रोकना। इसके लिए अंदरखाते ओबामा के लोगों के बीच मजबूत घेराबंदी करने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को लेकर व्हाइट को एक्टिवेट करने से कश्मीर के जिन्न को काबू करने में मदद मिलेगी। इस मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ बैठकर चाय-पानी करने का कोई मायने नहीं है। यदि ओबामा खुले तौर पर इस तरह की कोई कोशिश करते हैं तो उन्हें रोका जाना चाहिए।
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3 Responses to “कश्मीर पर ओबामा को रोकने की जरूरत”

  1. हरि said

    ओबामा पहले अपना घर संभाले।

  2. ये चौधरी पहले अपने घर मेँ अपनी चौधराहट कायम कर ले! लगभग आधे वोट ही पाये हैं।

  3. अरे हम कब तक भिखारियो की तरह से अमेरिका अमेरिका बोलते रहै गे. क्यो इन को सर पर बिठाते है??? क्या हमारी अपनी कोई ओकत नही??क्यो बन्दर बांट मै उलझे????हमारी अपनी लडाई है हमे अपने दम पर लडनी चाहिये…धन्यवाद

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