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एक रुपये की खबर

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on November 22, 2008

एक रुपये की खबर है। मुंबई में एयरटेल का 10 रुपये का प्री-पेड काड पर खुदड़ा बिक्रेता एक रुपया ज्यादा ज्यादा ले रहे हैं। यानि 10 रुपये का प्री-पेड काड 11 रुपये में बेचे जा रहे है। अब यह एक रूपये एयरटेल के तंत्र और बिचौलियों के बीच किस अनुपात में बट रहा है, इसका कोई लिखित रिकाड तो नहीं है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक यह एक रुपया का खेल करोड़ों के खेल में तब्दील हो गया है।
महानगरीय आबादी में मोबाईल फोन हर तबके की जरूरत बन चुकी है। गरीबी रेखा पर चलने वाले(यह गरीबी रेखा का कंसेप्ट हमेशा से कन्फ्युजिंग रहा है।)या इस रेखा के नीचे बसर करने वाले लोगों की अरथ व्यवस्था पर इस एक रुपये की कालाबाजारी का सीधा मार पड़ रहा है। ये लोग अक्सर अपने मोबाईल में 10 रुपये के प्री-पेड काड का इस्तेमाल करते हैं।
एयरटेल के 10 रुपये की प्री-पेड पर एक रुपया अतिरिक्त कमाने के लिए एयटेल के तंत्र से जुड़े आला अधिकारियों और खुदड़ा बिक्रेताओं के बीच गहरी सांठ-गांठ हुई है। पहले बहुत सलीके से 10 रुपये के प्री-पेड काड को मारकेट से गायब किया गया। इसकी स्कारसिटी बताई गई। कुछ दिन के बाद इसे 11 रुपये में बेचा जाने लगा।
आथिक मंदी के कारण लोगों की क्रयशक्ति कम हो गई है। 10 रुपये का यह प्री-पेड काड उन्हें सहजता से दूर-दराज के लोगों से जोड़ता है। इसकी खूब बिक्री होती है। एयरटेल के इस प्री-पेड काड की बिक्री से संबंधित कोई डाटा तो उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कुल गणित अरबो-खरबों का है। लोग इस 10 रुपये के काड के लिए बड़ी सहजता से 11 रुपये दे रहे हैं।
खुदड़ा बिक्रताओं का कहना है कि इस एक रुपये में से 50 पैसे उन्हें एयरटेल के संचालकों को अंदरखाते देने पड़ रहे हैं। कहीं यह ग्लोबलाजेशन का साइड इफेक्ट तो नहीं है। बहरहाल मामला जो हो, कालाबाजारी का यह खेल मुंबई में खुल कर खेला जा रहा है। चुंकि एयरटेल की कालाबाजारी का यह प्रयोग देश की आथिक राजधानी में सफल हो रहा है, इसलिए निसंदेह इसका इस्तेमाल देश के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा।
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6 Responses to “एक रुपये की खबर”

  1. इलाहाबाद में 20 रुपये किलो का सस्ता अमूल का दूध अमूमन मिलता नहीं। मिलता है तो दुकानदार 21 रुपये लेता है! मैं सोचता था इलाहाबाद ही चिरकुट है। बम्बई भी वैसा है!

  2. हर जगह यही हाल है भैया , जाएं तो जाएं कहां ?

  3. gyan dutt pandey ji, mamala chirkutai ka nahi hai…kalabazari aur munafakhori ka hai….aur yeh sangathith rup le raha hai…globlization ki tarah…yeh dekhane me lagata hai ki ek Rs chirkutai hai,lekin inaki jare bahut hi gahari hai, yadi Amartya sen is per sodh kare to unako samaj me aayega ki globlization per unhone ne ab tak kitana bakbas kiya hai…vaise cirkut kah kar aapane ise aam bhasha me dhal diya hai…prasha yeh hai ki is chirkutai se kaise nipata jaye? Sangira ji, jana kanha hai….hame to rasta talash karani hai…koi thos…pata nahi voh kaya hoga !

  4. Oh! maf kare sangita ji aapaka nam maine galat likh diaya hai, mera matlab hai aapake nam ki spelling.

  5. जायज चिन्ता है.

  6. हम सब चोर है, जिस का जहां जहा बस चलता है दुसरे को चुना लगाते है, हमारी नींव ही गलत पडी है, सब कुछ गडवड है अगर अभी ना समभले तो …… कल का सोचो क्या होगा ??

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