Aharbinger's Weblog

Just another WordPress.com weblog

लपटों में सबकुछ जलेगा–तेरा झूठ भी

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on November 26, 2008

तुमने हमे स्कूलों में पढ़ाया
कि देश को तुमने आजाद कराया,
हमने मान लिया,क्योंकि हम बच्चे थे।

हमारी खोपड़ी में दनादन कूड़ा उड़ेलेते रहे
और उसकी बदबू से उकता कर
जब भी हमने सवाल किया,
तुमने कहा, परीक्षाये पास करनी है तो पढ़ते जाओ,
और हम पढ़ते रहे, क्योंकि परीक्षाये पास करनी थी।

विज्ञान और गणित के सवाल तो ठीक थे,
लेकिन इतिहास के सवाल पर तुम हमेशा मुंह मोड़ते रहे,
और बाध्य करते रहे कि तुम्हारी सोच में ढलू
अच्छे और बुरे की पहचान तुम्हारी तराजू से करूं

कभी तुमने नहीं बताया, लेकिन अब समझ गया हूं
कि इतिहास पढ़ने और पढ़ाने की चीज नहीं है,
यह तो बनाने की चीज है।

मौजूदा सवालों से रू-ब-रू होकर
आज मैं तुमसे पूछता हूं—-
देश के टूटते ज्योगरफी की झूठी गौरव गाथा तुने क्यो लिखी ?
क्यों नहीं बताया कि हमारी सीमाओंका
लगातार रेप होता रहा, कभी अंदर से तो कभी बाहर से ?
तुमने सच्चाई को समझा नहीं ?
या तुम्हारे अंदर सच्चाई को बताने का साहस नहीं था?
या फिर सोच समझकर अपनी नायिकी को हमारे उभर थोपते रहे ?

तुमने वतमान के साथ-साथ खुद को धोखा दिया,
अब तेरी झूठी किताबें और नहीं…!!!
तेरी झूठ की कब्र तो खोदनी है,
रेगते हुये जन्तुओं की तरह
इतिहास से तुझे बेदखल तो होना ही पड़ेगा.

सवाल तेरा और मेरा नहीं है,
सवाल है कोटि-कोटि जन के दिमाग
में चिन्गारी छिटकाने की
क्योंकि चिंगारी ही तो लपटे बनती हैं,
और मुझे यकीन है,
इन लपटों में सबकुछ जलेगा—तेरा झूठ भी।

Advertisements

4 Responses to “लपटों में सबकुछ जलेगा–तेरा झूठ भी”

  1. बड़ा बढ़िया लिखा है नन्दन जी। और आप सतत बहुत बढ़िया लिख रहे हैं – या मैं ही आजकल आपको ज्यादा पढ़ रहा हूँ?

  2. बहुत बेहतरीन रचना है।बधाई स्वीकारें।सवाल तेरा और मेरा नहीं है,सवाल है कोटि-कोटि जन के दिमागमें चिन्गारी छिटकाने कीक्योंकि चिंगारी ही तो लपटे बनती हैं,और मुझे यकीन है,इन लपटों में सबकुछ जलेगा—तेरा झूठ भी।

  3. बहुत ही सुंदर ओर जलबंत लेख लिखा है आप ने.धन्यवाद एक ओर सच के लिये

  4. बहुत खूब ! यही सच है, पर काश इसका एहसास उन्हें होता जिनके लिए हम लिखते हैं.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: