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मल्हार गाती इतिहासकारों की टोली

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on January 24, 2009

हिटलर को लेकर दुनिया भर में बहुत कुछ कहा गया है,कहा जा रहा है और कहा जाता रहेगा। दुनियाभर के कलमची विश्व इतिहास में उसे महाखलनायक के रूप में स्थापित करने के लिए वर्षों से कलम घसीट रहे हैं,हिटलर शब्द को एक गाली के तौर पर स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। क्या विश्व इतिहास में हम हिटलर का मूल्यांकन कभी निरपेक्ष भाव से करने का साहस करेंगे,साहस इसलिए कि जहां आप हिटलर के गुणों को सामने लाने की कोशिश करेंगे,लोग आपके अंदर भी रावण को देखने लगेंगे।
हिटलर को मानवता का दाग बताया जाता है, क्योंकि उसने बहुत बड़े पैमाने पर यहुदियों की हत्या करवाई। सामूहिक हत्यायें तो इतिहास का अंग रहीं हैं, सिकंदर जब यूनान से अपनी सेना लेकर बढ़ा तो क्या किया था, युद्ध के बाद युद्ध, और युद्द के बाद युद्ध, और युद्ध के बाद युद्ध ! इन युद्धों को जस्टीफाई करने के लिए उसने अपने साथ इतिहासकारों की एक टोली छोड़ रखा था,जो कलात्मक तरीके से इन युद्धों को उचित ठहराते हुये सिकंदर के लिए मल्हार गाते हुये उसे एक विश्व विजेता के रूप में दर्ज कर रहे थे।
स्पार्टकस के नेतृत्व में जो सेना रोमन साम्राज्य के खिलाफ खड़ी हुई थी, उसका भी कलात्मक तरीके से रोमनो ने संहार किया था, चूंकि स्पार्टकस लोकगीतों में ढल गया, इसलिये इतिहासकारों के कलम से उसे कुछ खास नुकसान नहीं हुआ.
मोहम्मद के नेतृत् में इस्लाम के पताका के नीचे जो सेना दौड़ी थी वह नरसंहार नहीं तो और क्या कर रही थी, वो भी लोगों को सभ्यता का पाठ पढ़ाने के नाम पर। दिन प्रतिदिन की जिंदगी से जोड़कर बहुत ही मजबूती से इस्लाम की फिलॉसफी को स्थापित किया गया, जिसके कारण पूरा अभियान इतिहासकारों के दायरे से निकल कर जनमानस तक एक अचंभे के रूप में स्थापित हुआ।
नेपोलियन बोनापार्ट की सेना पूरे यूरोप को कुचलती रही और मसलती रही, और उसके इतिहासकार उसे एक महानायक के रूप में स्थापित करने में लगे रहे। चंगेज खान और अहमदशाह अब्दाली को भले ही एक बहुत बड़े भू-भाग के लोग खलनायक मानते हो, लेकिन अपने समय में अपने लोगो और अपनी सेना का ये दोनों हीरो था।
नरसंहार को लेकर हिटलर को खलनायक बनाने के लिए दुनिया भर में फैले यहुदियों की लॉबी ने मजबूती से काम किया है,जिनकी मजबूत पकड़ अमेरिका पर है और अमेरिका दूसरे विश्वयुद्ध का विजेता रहा है। इसके लिये प्रचार माध्यमों (न्यूज पेपर,टीवी, फिल्म, साहित्य,इतिहास लेखन आदि) का घनघोर इस्तेमाल किया गया है। पूरी दुनिया को उपनिवेशों में बाटने वाले ये देश हिटलर के खिलाफ युद्ध को लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर पर लड़ रहे थे। युद्ध में पराजय के बाद हिटलर को एक सनकी तानाशाह के रूप में प्रस्तुत किया जाना स्वाभाविक था। कोई भी विजित दल एसा ही करता। विजेताओं के लिए इतिहास की औकात रखैल से ज्यादा नहीं है। यही कारण है कि हिटलर मानवता के लिए एक नाजायज संतान की तरह दिखता है या दिखाया जाता है।
वाइमर गणतंत्र को दुनिया का सबसे मजबूत गणतंत्र माना जाता था। हिटलर के शासन में आने के पहले वहां के चुनावी परिदृश्य के आंकड़ों पर एक नजर मारने से स्पष्ट हो जाता है कि नाजी पार्टी वहां होने वाली लगातार चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बार-बार ऊभर रही थी। वाइमर गणंत्रण ही इस पार्टी को संभालने के काबिल नहीं था, वहां के लोग इस गणतंत्र के खोखलेपन से त्रस्त थे। जर्मनी में वाइमर गणत्रंत्र के दौरान बनी पेंटिंग और क्राफ्टिंग पर एक सरसरी नजर मारने से ही यह सप्ष्ट जो जाता है कि इस गणतंत्र को चलाने वाले लोग किस कदर अय्याशी और भ्रष्टाचार में डूबे हुये थे।
वर्साय की संधि के तहत जर्मनी को युद्ध अपराधी देश घोषित किया गया था और हर्जाने के रूप में उससे एक मोटी रकम की मांग की गई थी। अन्य देशों की तरह जर्मनी की इकोनॉमी भी बुरी तरह से बर्बाद हो गई थी। हर्जाना चुकाने के लिए मित्र राष्ट्रों ने उसे कर्ज दिये थे, यदि जर्मनी में हिटलर नहीं आता तो उस कर्ज के किश्त जर्मनी को आज तक चुकाने पड़ते। आर्थिक मामलों के पंडित लोग स्टैटिक उलट कर देख सकते हैं।
सत्ता में आने के लिए हिटलर ने वही तरीके अपनाये,जो उस समय के अनुकूल थे। मानवता और मानवाधिकारों की व्याख्या हमेशा से विजेताओं द्वारा सुविधा से करने का रिवाज रहा है। उस युग में हिटलर का नाजीवादी मूवमेंट निसंदेह भारत के हित में था। वह ब्रिटेन की कमर तोड़ रहा था, जो शताब्दियों से भारत का खून पी रहा था। नाजीवादियों ने ब्रिटेन की समुद्री शक्ति को चकनाचूर किया,जो बाद में भारत की स्वतंत्रता का मजबूत आधार बना। यूरोप की राजनिती मे हिटलर ने वही भूमिका निभाई, जिसे लेकर जर्मनी धधक रहा था। जर्मनी की सत्ता पर हिटलर रातो रात काबिज नहीं हुआ था, जर्मनी को लेकर एक आग निरंतर उसके अंदर धधक रही थी,धीरे-धीरे करके लोग उसके लपटों के प्रभाव में आते गये। अपने समय में बिखरे हुये अंगारों पर चलकर हिटलर ने देश की बागडोर संभाली थी,और इस तरह का काम कोई महानायक ही कर सकता है। तमाम वाद और तंत्र साधन नहीं साध्य हैं,असल बात है तपते हुये समय में कुशलता से देश को खेना।
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7 Responses to “मल्हार गाती इतिहासकारों की टोली”

  1. हिटलर को देखने का यह बिल्कुल नया नजरिया है भाई! खास तौर से भारत के सन्दर्भ में. इसीलिए तो नेताजी ने उससे दोस्ती की थी.

  2. रावण से भी लक्श्मण ने सीख ली थी. हिट्लर में भी बहुत सारी अच्छाइयाँ रही होंगी. संकट के समय देश को एक दिशा दी. अच्छा लेख. आभार.

  3. पोस्ट सोचने को बाध्य करती है।

  4. chetna said

    kya aap vahi alok nandan hain jinhon ne iibm,patna se 1996-97 mein journalism ki degree hasil ki thi?

  5. नमस्कार, हां हिटलर को लोग बहुत बुरा कहते है, जेसे सद्दमा हुसेन को, लेकिन इसी हिटलर ने जर्मन को दुनिया का सब से अमीर देश बना दिया, दुसरे विश्व युद्ध से पहले यहां ( जर्मन) मै सभी यहुदी बहुत अमीर थे, ओर आम आदमी को खाना भी नही मिलता था, लोगो को सखत मेहनत के बाद भी कपडा ओर खाना नही मिलता था, ओर यहुदी लोग इन का खुन पी कर ऎश करते थे, इन सब तंगियो मे ही हिटलर का जन्म हुआं, ओर उस ने सभी यहुदियो को मार भगाया, दुसरे विशव युद्ध के समय ओर बाद मै जर्मन के एक मकान की भी छत नही बची थी इन अमेरिकनो के कारण, ओर अगर हिटलर सिर्फ़ एक गलती ना करता तो आज अमेरिका का नाम भी ना होता, जर्मन आज भी शर्मिन्दा है इस हिटलर के कारण, लेकिन इस जर्मन को नयी जिन्दगी देने वाला भी हिटलर ही था, आज पुरी दुनिया मै जर्मन सब से ज्यादा अमीर है, ओर यहां के लोग मेहनती भी है , कारण हिटलर.काश आज भारत मै भी एक हिटलर आये.धन्यवाद

  6. आपके तर्क से पूर्णतया सहमत हूँ। इस अभागे देश की यही विडम्बना रही है कि हम मित्रों को पहचानने में हमेशा ग़लती करते आये हैं। हिटलर का उदाहरण रहा हो या अस्सी के दशक के बाद इंदिरा परवर्ती सरकारों की अभिन्न मित्र रूस के प्रति उदासीनता। हर बार हम या तो दोस्तों को पहचान नहीं पाते या फ़िर अपनी अदूरदर्शिता के फलस्वरूप उन्हें खो देते हैं। एक अनछुआ विषय लेने के लिये साधुवाद…..

  7. आप वही चेतना हैं जो कवितायें लिखा करती थी

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