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kavita

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on June 19, 2009

अन्धकार
अन्धकार
एक शक्तिमान सत्य है
जो चढ़ बैठता है
तपते सूरज के ज्वलंत सीने पर
आहिस्ता आहिस्ता ।
अंधकार
बहुत कुछ आत्मसात कर लेता है
स्वयं में
और
सबको जरूरत होती है
अंधकार की
कुछ देर के लिए ।
हम ख़ुद भी
रक्षा करना चाहते हैं अंधकार की
उस पार देखना भी नहीं चाहते हैं
और
जिनकी दृष्टि
अंधकार के उस पार जाती है
उन्हें हम उल्लू कहते हैं ।

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8 Responses to “kavita”

  1. अन्धकारएक शक्तिमान सत्य हैजो चढ़ बैठता हैतपते सूरज के ज्वलंत सीने परआहिस्ता आहिस्ता । बहुत बढ़िया रचना .

  2. एक अच्छी रचना .

  3. रचना तो बहुत बढ़िया है,लेकिन प्रकाश भी एक शक्तिमान सत्य है।

  4. Anonymous said

    सचमुच हम उल्लू अंधकार के उस पार देखने वालों को उल्लू कहते हैं .बहुत खूब !

  5. वाह!! बहुत बढिया लिखा है।बधाई।

  6. बहुत बढ़िया लिखा है ….. थोडा हट के

  7. हम ख़ुद भीरक्षा करना चाहते हैं अंधकार कीउस पार देखना भी नहीं चाहते हैंऔरजिनकी दृष्टिअंधकार के उस पार जाती हैउन्हें हम उल्लू कहते हैं । ये लाइन ख़ास पसंद आई वीनस केसरी

  8. sanjay rai said

    ulluon ko pahchanne ke liye badhaee.log inhe kyon gaali ke roop me use karte hai samajh se pare hai.sanjay rai

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