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शहनाई भी होएगी

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on September 4, 2009

रतन

फूलों की महकेगी खुशबू
पुरवाई भी होएगी
तारों की बारातें होंगी
शहनाई भी होएगी

पतझड़ बाद बसंती मौसम
का आना तय है जैसे
दर्द सहा है तो कुछ पल की
रानाई भी होएगी

कोई नहीं आया ऐसा जो
रहा सिकंदर उम्र तलक
इज्जत होगी शोहरत के संग
रुसवाई भी होएगी

तन्हा रहते गुमसुम गुमसुम
पर यह है उम्मीद हमें
कुछ पल होगा साथ तुम्हारा
परछाई भी होएगी

मैंने जाना जीवन-दुनिया
सब कुछ आनी-जानी है
सुख का समंदर भी गुजरेगा
तनहाई भी होएगी

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5 Responses to “शहनाई भी होएगी”

  1. पतझड़ बाद बसंती मौसमका आना तय है जैसेदर्द सहा है तो कुछ पल कीरानाई भी होएगी–बहुत बढ़िया..साकारात्मक!!

  2. बहुत बढ़िया…

  3. बहुत सुन्दर विचार…आशावादी संकल्पना…रतनजी को साधुवाद…

  4. पतझड़ बाद बसंती मौसमका आना तय है जैसेदर्द सहा है तो कुछ पल कीरानाई भी होएगी..bahut khuub

  5. sakaratmak urja liye hue

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