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फाल्गुन आया रे !

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on February 19, 2010

गोरी को बहकाने
फाल्गुन आया रे ।
रंगों के गुब्बारे
फूट रहे तन आँगन,
हाथ रचे मेंहदी के
याद आते साजन ॥
प्रेम-रस बरसाने
फाल्गुन आया रे ।
यौवन की पिचकारी
चंचल सा मन,
नयनों से रंग कलश
छलकाता तन ॥
तन-मन को भरमाने
फाल्गुन आया रे ।
[] राकेश ‘सोहम’
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8 Responses to “फाल्गुन आया रे !”

  1. incitizen said

    आ गया है. स्वागतम

  2. गली-गली में घूम रहीं हैं, हुलियारों की टोली। नाच उठी चञ्चल नयनों में, रंगों की रंगोली।। उड़ते हैं अम्बर में गुलाल, नभ-धरा हो गये लाल-लाल, गोरी का बदरंग हाल, थिरकी है हँसी-ठिठोली। नाच उठी चञ्चल नयनों में, रंगों की रंगोली।।

  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति।इसे 20.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।http://chitthacharcha.blogspot.com/

  4. गोरी को बहकानेतन-मन को भरमानेफाल्गुन आया रे ।बहुत सामयिक रचना…आभार.

  5. Smarika said

    Bahut acchi rachna..

  6. आ गया फ़ागुन, झंकार होने लगी है।

  7. फागुनी रंगों की अद्भुद छटा बिखेरती सरस मुग्धकारी रचना….पढवाने के लिए बहुत बहुत आभार…

  8. Baliram said

    Sir hamko bhojpuri sangit ka word likhne ke liy kaha se mily ga

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