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हैप्पी मदर्स दे के अवसर पर !

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on May 9, 2010

आज के आधुनिक परिवेश में माँ की स्थिति को उकेरती मेरी पसंद की स्वरचित कविता

मैं और वो ?

मुझे एसी में
नींद आती है ,
उसके पास टेबल फेन है
जो आवाज़ करता है ।

मैं ऊंचे दाम के
जूते पहनता हूँ ,
उसके पास
बरसाती चप्पल है ।

मैं हँसता हूँ
वो रो देती है,
मैं रोता हूँ
वो फूट पड़ती है !

मैं, मैं हूँ
वो मेरी माँ है ।

[] राकेशसोहम

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11 Responses to “हैप्पी मदर्स दे के अवसर पर !”

  1. मैं हँसता हूँवो रो देती है,मैं रोता हूँवो फूट पड़ती है sabse achchha , kyonki maa ke liye koi shabd bane hi nahinhttp://sanjaykuamr.blogspot.com/

  2. संसार की समस्त माताओं को नमन

  3. सुन्दर रचना ..कुछ पंक्तिया लाजवाब ….अच्छा सृजन….बस इसे पढ़कर यही कहूँगा दुनिया की हर माँ को मेरा शत-शत नमन http://athaah.blogspot.com/

  4. great post :)मदर्स डे के शुभ अवसर पर …… टाइम मशीन से यात्रा करने के लिए…. इस लिंक पर जाएँ :http://my2010ideas.blogspot.com/2010/05/blog-post.html

  5. संसार की सभी माताओं को नमन्‌।आपकी पसन्दीदा कविता मुझे भी पसन्द आयी। साधुवाद।

  6. मां जैसा कोई और नहीं..

  7. हृदय छू गयी ।

  8. आपकी रचना बहुत बढ़िया है!मातृ-दिवस पर ममतामयी माँ को प्रणाम तथा कोटि-कोटि नमन!

  9. hem pandey said

    वो सबकी माँ है.

  10. बहुत खूबसूरत परिभाषा दी आपने ,आज की संतानों की भी और माँ की भी मुबारक हो ….

  11. आपकी रचना बहुत खूबसूरत है!कोई नहीं है..मां जैसा..लाजवाब ….आपकी रचना हृदय छू गयी ।

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