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आप क्या तय कर रहे हैं?

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on November 30, 2010

बिहार चुनाव के नतीजों ने पूरी भारतीय राजनीति को झकझोर दिया है. जाति-धर्म-क्षेत्र जैसे झूठे मुद्दों पर बन्दर की तरह नाचने वाले देसी मतदाताओं ने इन छलावों को मेटहे में बन्द कर लोकतंत्र की बहती नदी की तीव्र धारा के हवाले कर दिया है. बबुआ का जादू भी नहीं चला. स्विस बैंक के खुलासे सामने हैं और आम भारतीय उनमें रुचि ले रहा है. ग़ौर करने की ज़रूरत है, यह लगभग वैसा ही दौर है, जैसा राजीव गान्धी के दौर में हुआ था. आम आदमी का ध्यान पहली बार ख़ास लोगों के काले कारनामों की ओर गया था और जिसने झूठमूठ मुद्दा बना कर जनता को बहकाया था उसी ने मदारी के झोले से मंडल कमीशन की सिफ़ारिशों का ख़तरनाक सांप निकाल दिया था. कांग्रेस को छात्र नेताओं के जरिये अपनी राजनीति चमकाने का मौक़ा मिल गया और उसने तुरंत पिछले दरवाज़े से छात्र नेताओं को हवा देकर आत्मदाहों का दौर चलवा दिया. पूरे देश में लगभग ख़त्म हो चुका जातिवाद नए सिरे से स्थापित हो गया.

यह न तो अकेले कांग्रेस की चाल थी, न वीपी सिंह की और न भाजपा की. वस्तुतः यह इन सबकी मिली-जुली चाल थी. इस बात पर व्यापक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में सोचने की ज़रूरत है. हम फिर एक कठिन दौर में आ गए हैं. राजनेताओं की रोजी-रोटी छिनती दिख रही है और मीडिया व व्यावसायिक जगत के बड़े-बड़े टायकूनों के लंगोटे उतर रहे हैं. बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है. क्योंकि असली मुद्दों के प्रति आम आदमी की जागरूकता भारतीय राजनेता बर्दाश्त नहीं कर सकते. राजनीति की रहस्यमय बोतल से जल्दी ही जाति-धर्म-क्षेत्र-संप्रदाय … का कोई नया जिन्न निकलने ही वाला है. ऐसे में एक समझदार मनुष्य होने के नाते आपको पहले से ही अपनी भूमिका तय करके रखनी है. आप क्या तय कर रहे हैं?

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6 Responses to “आप क्या तय कर रहे हैं?”

  1. चलो अच्छा हुआ!जमीन पर कदम तो पड़ेंगे!

  2. जब विकास सर चढ़ बोलेगा, सारे बन्दर भागते दिखायी पड़ेंगे।

  3. आपकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि ये चाल सबकी मिली जुली ही थी| ऐसा लगता है जैसे रंगमंच पर सबने रोल तय किये हुए है|

  4. राजनेताओं की रोजी-रोटी छिनती दिख रही है और मीडिया व व्यावसायिक जगत के बड़े-बड़े टायकूनों के लंगोटे उतर रहे हैं. बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है. क्योंकि असली मुद्दों के प्रति आम आदमी की जागरूकता भारतीय राजनेता बर्दाश्त नहीं कर सकते….आपने सही लिखा है। जनता ने नब्ज पकड़ी है, लेकिन इसमें २० साल लग गए क्या http://satyendrapratap.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html मनमोहन समस्या भी अबसे २० साल बाद ही जनता पकड़ पाएगी?

  5. यह प्रयोग सफल हो…

  6. janata samajhati to hai lekin thodi der se! bhojpuri mein ek kahawat hai ki Akhir budhiya gawanaa gayi lekin …..sahi samay par sahi prahaar hona chahiye.

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