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आओ बदलें शहरों की आत्मा…

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on February 6, 2011

गांवों का शहरीकरण हुआ इसमें बुराई भी क्या है..सुख-सुविधा संपन्न हों हमारे गाँव अच्छा ही तो है, लेकिन क्यूँ न हम गाँव वाले जो गाँवबदर हो शहर आ बसे,कुछ ऐसा करें कि शहरों की काया तो शहरी ही हो पर आत्मा का जरुर ग्रामीनिकरण हो जाये….सुख-सुविधा तो शहर की हों पर अपनापन,संबंधों की मिठास, छोटे-बड़े का सम्मान, रिश्तों की गरिमा, खानपान,मस्ती,आबोहवा और अनेकता में एकता से जीने का अहसास गाँव का हो..आप क्या कहते हैं.. ..?
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4 Responses to “आओ बदलें शहरों की आत्मा…”

  1. poonam said

    agar aesa ho jaye to kitna acha ho..

  2. सच कहा आपने, कोई तो स्थिरता आये इस धमाचौकड़ी में।

  3. सही कह रहे हैं.

  4. ZEAL said

    एक मधुर स्वप्न !

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