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Archive for the ‘अपनी बात’ Category

खून देने से कमजोरी आती है !!!

Posted by Isht Deo Sankrityaayan on July 7, 2010

रक्त दान जीवन दान !
क्या यह शब्द समूह केवल एक वाक्य है ? क्या अब भी बहुतायत इसे केवल एक नारे की तरह उच्चारते हैं ?
शायद हाँ ।
दो दिन पूर्व शहर के एक सरकारी अस्पताल में एक पति ने प्रसव के लिए अपनी पत्नि को भर्ती किया । पत्नि की शल्य क्रिया के दौरान ओ पाजिटिव रक्त की ज़रुरत थी । भाग्य से उसके पति का रक्त भी ओ पाजिटिव निकला । लेकिन पति ने रक्त देने से मना कर दिया ! उसका कहना था कि खून देने से कमजोरी आती है ।
अभागी पत्नि का भाग्य दुर्भाग्य में बदलते देर न लगी । उसके पति ने ही उसे रक्त दान करने से मना कर दिया तो चिकित्सक भौचक्के रह गए ! वह बार-बार दलील देता रहा कि वह कमज़ोर नहीं होना चाहता । पैथालौज़ी के कर्मचारियों ने जब रक्त देते अन्य अनेक का उदाहरण दिखाया तब जाकर वह माना ।
जागरूकता का आलाप छेड़ने वाले आला अधिकारी पहले खुद जागें ताकि जागरूकता की अलख की रौशनी तमाम सोये हुओं तक पहुँच सके ।
केवल मंत्र सा उच्चारती ‘रक्त दान जीवन दान’ वाली इलेक्ट्रोनिक मशीन लगा देने से मनोरंजन होता है और जेबें भरती हैं बस !!!

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